गणेश चतुर्थी पर बप्पा की मूर्ति घर लाने जा रहे हैं? स्थापना से पहले इन बातों को जरूर जान लें
लेकिन गणेश जी की मूर्ति घर लाने से पहले एक सवाल लगभग हर परिवार में उठता है आखिर बप्पा की मूर्ति कैसी होनी चाहिए और स्थापना के समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? इंटरनेट पर इसको लेकर इतनी सारी बातें मिलती हैं कि कई बार पूजा से ज्यादा चिंता नियमों की होने लगती है। जबकि हर बात को कठोर नियम मान लेना भी सही नहीं है। कई बातें धार्मिक मान्यताओं और परिवार की परंपराओं से जुड़ी हैं, इसलिए उन्हें उसी रूप में समझना बेहतर है।
इस बार गणेश चतुर्थी कब है?
साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी। इसी वजह से कुछ जगह 13 सितंबर को लेकर भ्रम दिखाई दे रहा है, लेकिन गणेश चतुर्थी का मुख्य पर्व और गणपति स्थापना 14 सितंबर को ही की जाएगी।
गणपति पूजा के लिए दोपहर के आसपास का समय विशेष माना जाता है। उदाहरण के लिए दिल्ली में इस दिन गणेश पूजा का मुहूर्त लगभग सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है। दूसरे शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय कुछ आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए स्थापना के लिए अपने शहर का पंचांग देखना ज्यादा ठीक रहेगा।
यानी सिर्फ तारीख देखकर पूजा का समय तय कर लेना जरूरी नहीं है। खासकर अगर आप घर में विधिवत स्थापना करने जा रहे हैं तो स्थानीय समय देखना बेहतर रहेगा।
मूर्ति खरीदते समय सबसे पहले क्या देखें?
गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय बहुत से लोग सिर्फ सुंदरता देखते हैं। रंग अच्छा है, सजावट अच्छी है और चेहरा आकर्षक है तो मूर्ति पसंद आ जाती है। इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन घर में स्थापना के लिए मूर्ति लेते समय एक और बात ध्यान में रखी जा सकती है मूर्ति ऐसी हो जिसे संभालना और बाद में विसर्जित करना आसान हो।
मिट्टी की मूर्ति इस लिहाज से अच्छी मानी जाती है। आजकल बाजार में कई तरह की मूर्तियां मिलती हैं और लोग अपनी सुविधा, परंपरा और पसंद के हिसाब से चुनाव करते हैं। पर्यावरण की दृष्टि से भी प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमा बेहतर विकल्प हो सकती है, क्योंकि विसर्जन के बाद उसके पानी और आसपास के वातावरण पर कम असर पड़ता है।
मूर्ति कितनी बड़ी होनी चाहिए, इसका कोई एक ऐसा आकार नहीं है जिसे हर घर के लिए जरूरी कहा जा सके। घर में जितनी जगह हो और जिस तरह पूजा की व्यवस्था करनी हो, उसी हिसाब से प्रतिमा लेना अच्छा रहता है।
बप्पा को घर में कहां बैठाएं?
यह सवाल भी काफी आम है। गणपति की स्थापना के लिए घर में ऐसी जगह चुनना ठीक रहता है जहां साफ-सफाई हो, पूजा के समय परिवार आसानी से बैठ सके और आने-जाने में परेशानी न हो। पूजा की जगह को पहले से साफ करके वहां एक चौकी या आसन रखा जा सकता है और उसके ऊपर साफ कपड़ा बिछाया जाता है।
मूर्ति को सीधे जमीन पर रखने के बजाय आसन पर स्थापित करने की परंपरा कई घरों में रही है। इसके पीछे सबसे सीधी बात यही है कि जिस देवता की पूजा की जा रही है, उनके लिए एक साफ और सम्मानजनक स्थान तैयार किया जाए।
मूर्ति के आसपास जरूरत से ज्यादा सामान भर देने की भी जरूरत नहीं है। फूल, दूर्वा, दीपक, धूप, नैवेद्य और पूजा की जरूरी चीजें व्यवस्थित ढंग से रखी हों तो पूजा की जगह ज्यादा सुंदर और शांत लगती है।
गणेश जी की सूंड किस तरफ होनी चाहिए?
मूर्ति की सूंड को लेकर सबसे ज्यादा बातें सुनने को मिलती हैं। कई लोग दाईं ओर सूंड वाली मूर्ति को लेकर विशेष नियम बताते हैं और बाईं ओर सूंड वाली मूर्ति को घर के लिए आसान बताते हैं। लेकिन इस विषय में अलग-अलग परंपराएं और मान्यताएं मिलती हैं।
इसलिए इसे ऐसा नियम मान लेना ठीक नहीं होगा कि किसी एक दिशा की सूंड वाली मूर्ति ही घर में रखी जा सकती है। अगर आपके परिवार में वर्षों से किसी विशेष रूप की गणेश प्रतिमा की पूजा होती रही है तो उसी परंपरा को महत्व देना ज्यादा सहज है। पूजा का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का स्मरण करना है।
स्थापना के समय किन चीजों की जरूरत पड़ सकती है?
गणेश पूजा में दूर्वा, फूल, चंदन, रोली या कुंकुम, अक्षत, दीपक, धूप, फल और नैवेद्य जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। मोदक या लड्डू गणेश जी के प्रिय भोग के रूप में चढ़ाए जाते हैं। पूजा की सामग्री की लंबी सूची देखकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। आपके घर में उपलब्ध साफ-सुथरी पूजा सामग्री और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा की जा सकती है।
सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा की तैयारी आखिरी समय पर न हो। स्थापना के दिन अगर कपड़ा, फूल, दीपक या नैवेद्य के लिए इधर-उधर भागना पड़े तो पूजा का माहौल ही बिगड़ जाता है। इसलिए एक दिन पहले जरूरी सामान अलग रख देना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा।
क्या स्थापना के लिए बहुत सारे नियम जरूरी हैं?
यही वह बात है जिसे लेकर आजकल सबसे ज्यादा उलझन दिखाई देती है। किसी वीडियो में एक नियम बताया जाता है, किसी पोस्ट में दूसरा। कहीं कहा जाता है कि बिना अमुक चीज के पूजा पूरी नहीं होगी तो कहीं किसी और बात को जरूरी बताया जाता है।
धार्मिक पूजा में विधि का अपना महत्व है, लेकिन घर में गणपति स्थापना को इतना कठिन बना देना भी उचित नहीं कि सामान्य परिवार पूजा करने से ही घबरा जाए। अगर आपको पूरी विधि आती है तो उसी के अनुसार पूजा करें। अगर किसी विशेष मंत्र या विधि की जानकारी नहीं है तो परिवार की परंपरा के अनुसार सरल पूजा, आरती और गणेश जी का स्मरण भी श्रद्धा से किया जा सकता है।
किसी भी धार्मिक मान्यता को बताते समय यह फर्क समझना जरूरी है कि क्या शास्त्रीय विधि है और क्या किसी परिवार या क्षेत्र की प्रचलित मान्यता। दोनों को एक जैसा बताने से ही अक्सर लोगों में भ्रम पैदा होता है।
एक और बात, जिसे लोग अक्सर भूल जाते हैं
गणेश चतुर्थी सिर्फ मूर्ति स्थापित करने का दिन नहीं है। असली माहौल उस समय बनता है जब घर के लोग कुछ समय के लिए साथ बैठते हैं। पूजा के दौरान बच्चे भी शामिल हों, उन्हें गणेश जी की कहानी और त्योहार के बारे में बताया जाए, परिवार साथ में आरती करे तो उत्सव का मतलब सिर्फ सजावट और प्रसाद तक सीमित नहीं रहता।
और अगर घर में गणपति कुछ दिनों के लिए विराजमान किए जा रहे हैं तो विसर्जन की योजना भी पहले बना लेना चाहिए। 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है, हालांकि कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच या सात दिन बाद भी विसर्जन करते हैं।
गणपति को घर लाने की खुशी में सबसे जरूरी चीज शायद यही है कि पूजा को बोझ न बनाया जाए। साफ जगह, श्रद्धा, अपनी परंपरा के अनुसार पूजा और परिवार के साथ कुछ शांत पल इसी में गणेश उत्सव की खूबसूरती है।
इस बार जब बप्पा को घर लाने जाएं तो सिर्फ यह न सोचें कि मूर्ति कितनी सुंदर है। यह भी सोचें कि उनके स्वागत के लिए घर में कितना सुकून और अपनापन तैयार किया है। आखिर गणेश चतुर्थी का उत्सव घर को सजाने से ज्यादा घर के माहौल को खुशियों से भरने का अवसर है।
