Instagram पर बनी गर्लफ्रेंड, मिलने पहुँचा तो सामने थी अपनी ही पत्नी, फिर खुला पति का सबसे बड़ा राज
पति की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उसने 'एंजेल शर्मा' नाम से सोशल मीडिया पर एक फर्जी प्रोफाइल बनाई। कुछ ही दिनों में उसी प्रोफाइल से पुलिसकर्मी की दोस्ती हो गई। उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि जिस लड़की से वह रोज़ बातें कर रहा है, वह कोई और नहीं बल्कि उसकी अपनी पत्नी है। बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती से आगे बढ़ने लगी। पुलिसकर्मी अपने मन की बातें एंजेल शर्मा से साझा करने लगा। फिर उसने मिलने की इच्छा जताई, प्यार का इज़हार किया, किस और गले लगाने जैसी बातें कीं। बाद में उसने शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा भी जाहिर कर दी। पत्नी हर संदेश का स्क्रीनशॉट लेती रही। जब उसके पास पर्याप्त सबूत इकट्ठे हो गए, तब उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामला अदालत पहुँचा, जहाँ पत्नी को अंतरिम गुजारा भत्ता और आर्थिक सहायता देने का आदेश दिया गया। यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा, क्योंकि जिस व्यक्ति पर कानून की रक्षा की जिम्मेदारी थी, उसी पर अपनी पत्नी के साथ क्रूर व्यवहार और धोखे का आरोप लगा।
इसी तरह की एक और घटना कुछ समय बाद मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सामने आई। यह मामला भले ही अलग था, लेकिन इसकी कहानी भी उतनी ही चौंकाने वाली थी। फर्क सिर्फ इतना था कि यहाँ मामला अदालत तक पहुँचने से पहले ही रिश्ते को बचाने की कोशिश की गई। ग्वालियर के माधवगंज इलाके में रहने वाले विजय कुमार की शादी को लगभग एक साल से कुछ अधिक समय हुआ था। शुरुआती महीनों में पति-पत्नी की जिंदगी सामान्य थी। दोनों साथ घूमते, बातें करते और भविष्य की योजनाएँ बनाते थे। लेकिन धीरे-धीरे पत्नी ने महसूस किया कि विजय बदलने लगा है। पहले जो व्यक्ति घर लौटते ही घंटों उससे बातें किया करता था, अब उसका अधिकांश समय मोबाइल पर बीतने लगा था। वह हर समय किसी न किसी से चैट करता रहता, लेकिन पत्नी के किसी सवाल का सीधा जवाब नहीं देता।
सबसे ज़्यादा शक तब हुआ, जब पत्नी ने देखा कि विजय ने अपने मोबाइल के हर सोशल मीडिया ऐप पर अलग-अलग पासवर्ड लगा रखा है। Instagram, Facebook, WhatsApp—सब कुछ लॉक था। अगर कभी पत्नी उसके हाथ से मोबाइल लेने की कोशिश करती, तो वह तुरंत फोन वापस ले लेता। पहले उसने सोचा कि शायद यह सिर्फ निजी आदत होगी, लेकिन समय बीतने के साथ उसे महसूस होने लगा कि विजय उससे कुछ छिपा रहा है। कई बार उसने सीधे पूछना भी चाहा कि आखिर वह किससे इतनी देर तक बातें करता है, लेकिन हर बार विजय कोई न कोई बहाना बनाकर बात टाल देता।
धीरे-धीरे पत्नी के मन में यह शक गहराने लगा कि कहीं उसके पति का किसी दूसरी महिला से रिश्ता तो नहीं है। बिना किसी सबूत के आरोप लगाना उसे सही नहीं लगा। उसने तय किया कि पहले सच्चाई जाननी होगी। कई दिनों तक सोचने के बाद उसने एक ऐसा तरीका अपनाया, जिसकी विजय ने शायद कभी कल्पना भी नहीं की थी। उसने एक नया सोशल मीडिया अकाउंट बनाया। इस प्रोफाइल पर उसने अपना नाम 'मोना' रखा, किसी दूसरी युवती की तस्वीर लगाई और पूरी प्रोफाइल इस तरह तैयार की कि देखने वाले को ज़रा भी शक न हो।
कुछ देर तक वह मोबाइल की स्क्रीन देखती रही। आखिरकार उसने वही फ्रेंड रिक्वेस्ट विजय कुमार को भेज दी। उसके मन में कई सवाल थे—क्या विजय इस रिक्वेस्ट को स्वीकार करेगा? क्या वह किसी अनजान लड़की से बात करेगा? या फिर तुरंत उसे नज़रअंदाज़ कर देगा? लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसका जवाब सामने था। विजय ने बिना किसी हिचकिचाहट के रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली।
यहीं से शुरू हुई एक ऐसी बातचीत, जिसने आने वाले कुछ महीनों में एक पति की छिपी हुई जिंदगी का ऐसा सच सामने रखा, जिसकी उसने खुद भी कभी कल्पना नहीं की थी...
मोना के नाम से भेजी गई फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार होने के बाद बातचीत की शुरुआत बिल्कुल सामान्य अंदाज़ में हुई। पहले दोनों ने एक-दूसरे का परिचय जाना, फिर रोज़मर्रा की बातें होने लगीं। लेकिन कुछ ही दिनों में विजय कुमार का व्यवहार बदलने लगा। वह सुबह उठते ही मोना को "गुड मॉर्निंग" भेजता और रात को सोने से पहले आखिरी संदेश भी उसी के लिए लिखता। ऑफिस में फुर्सत मिलती तो चैट, घर पहुँचता तो चैट, देर रात तक मोबाइल हाथ में लेकर बैठा रहता। उसे इस बात का ज़रा भी एहसास नहीं था कि जिस लड़की से वह अपने मन की बातें साझा कर रहा है, वह उसकी अपनी पत्नी है।
उधर पत्नी हर संदेश को ध्यान से पढ़ती थी। वह जल्दबाज़ी में कोई निष्कर्ष नहीं निकालना चाहती थी। उसका उद्देश्य सिर्फ इतना था कि वह अपने पति की सच्चाई अपनी आँखों से देख सके। धीरे-धीरे विजय ने अपनी निजी बातें भी मोना से साझा करनी शुरू कर दीं। उसने बताया कि वह अकेला रहता है, उसकी जिंदगी में कोई नहीं है और उसे एक ऐसी लड़की की तलाश है जो उसे समझ सके। यह पढ़कर पत्नी के हाथ काँप गए। जिस व्यक्ति के साथ उसने सात फेरे लिए थे, वही किसी दूसरी लड़की के सामने खुद को अविवाहित बता रहा था।
कुछ सप्ताह बाद मोना ने बातचीत के दौरान सहजता से पूछा, "क्या तुम्हारी शादी हो चुकी है?"
विजय ने बिना एक पल सोचे जवाब दिया, "नहीं, मैं बिल्कुल सिंगल हूँ। अभी तक शादी नहीं की।"
यह जवाब पत्नी के लिए सबसे बड़ा झटका था। अब उसका शक लगभग यकीन में बदल चुका था। उसने तय किया कि अभी अपनी पहचान उजागर नहीं करेगी। वह देखना चाहती थी कि विजय इस रिश्ते को कहाँ तक ले जाना चाहता है।
समय बीतने के साथ दोनों की बातचीत और गहरी होती गई। विजय अब मोना से अपने भविष्य की बातें करने लगा। वह कहता कि उससे बात करके उसे सुकून मिलता है। कई बार वह घंटों तक ऑनलाइन रहता और अगर मोना कुछ देर जवाब न देती, तो बार-बार संदेश भेजकर पूछता कि वह नाराज़ तो नहीं है। पत्नी यह सब देखकर हैरान थी। घर में वही व्यक्ति उससे ठीक से दो मिनट बात नहीं करता था, लेकिन मोबाइल की स्क्रीन के पीछे बैठी एक अनजान लड़की के लिए उसके पास घंटों का समय था।
करीब दो महीने बाद विजय ने पहली बार मोना की आवाज़ सुनने की इच्छा जताई। उसने लिखा, "आजकल फर्जी आईडी बहुत बनती हैं। मुझे यकीन कैसे होगा कि तुम सच में वही हो जो खुद को बता रही हो? मैं तुमसे फोन पर बात करना चाहता हूँ।"
यह पत्नी के लिए सबसे कठिन मोड़ था। अगर वह खुद बात करती, तो विजय तुरंत उसकी आवाज़ पहचान लेता। काफी सोचने के बाद उसने अपनी छोटी बहन को पूरी बात बताई। पहले तो बहन को विश्वास ही नहीं हुआ कि कोई पति अपनी ही पत्नी को पहचान नहीं पा रहा है। लेकिन जब उसने पूरी चैट पढ़ी, तो वह भी हैरान रह गई। दोनों बहनों ने तय किया कि जब भी पत्नी मायके आएगी, तब छोटी बहन मोना बनकर विजय से बात करेगी।
योजना सफल रही। मायके पहुँचने के बाद पहली बार छोटी बहन ने आवाज़ बदलकर विजय से बात की। दूसरी तरफ विजय को कोई शक नहीं हुआ। उल्टा उसका भरोसा और मजबूत हो गया। अब उसे यकीन हो गया था कि मोना कोई वास्तविक लड़की है।
इसके बाद बातचीत सिर्फ Facebook Messenger तक सीमित नहीं रही। पत्नी ने अपनी बहन के नाम से एक नया सिम कार्ड खरीदा और उसी नंबर से WhatsApp शुरू किया। अब चैटिंग पहले से भी ज़्यादा होने लगी। कभी घंटों मैसेज चलते, तो कभी देर रात तक फोन पर बातें होतीं। विजय हर दिन मोना के और करीब आता जा रहा था।
इसी दौरान उसने पहली बार मोना से कहा कि वह उससे मिलना चाहता है। पहले मोना ने बहाना बना दिया, लेकिन विजय बार-बार मिलने की जिद करने लगा। उसने कहा कि बिना मिले वह इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ा सकता। बात यहीं नहीं रुकी। कुछ समय बाद उसने मोना से पूछा कि क्या वह उससे शादी करेगी।
मोना ने भी उसी अंदाज़ में जवाब दिया, "शादी का फैसला मिलने के बाद ही किया जा सकता है। पहले हम एक-दूसरे को देख तो लें।"
विजय इस जवाब से बेहद खुश हो गया। उसे लगा कि अब उसकी मंज़िल दूर नहीं है। उसने ग्वालियर के एक अच्छे रेस्टोरेंट में मिलने का प्रस्ताव रखा। कई दिनों की बातचीत के बाद आखिरकार मार्च 2025 के पहले सप्ताह की एक तारीख तय हो गई।
उधर पत्नी ने भी सब कुछ सोच-समझकर योजना बना ली थी। उसने तय कर लिया कि वह उसी दिन अपने पति को उसकी सबसे बड़ी सच्चाई से रूबरू कराएगी। विजय को इस बात का बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि जिस मुलाकात का वह बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है, वही उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा झटका साबित होने वाली है।
मार्च 2025 का पहला सप्ताह था। सुबह घर से निकलते समय विजय कुमार ने हमेशा की तरह अपनी पत्नी से कहा कि उसे एक महत्वपूर्ण क्लाइंट से मिलने जाना है। उसने यह भी बता दिया कि मीटिंग लंबी चल सकती है, इसलिए देर रात तक लौटने की संभावना है। उसने पत्नी से कहा कि उसके लिए खाना पैक न करे, क्योंकि वह बाहर ही खाना खा लेगा। पत्नी ने बिना किसी सवाल के उसकी बात मान ली। उसने ऐसा जताया जैसे उसे कुछ भी पता न हो, लेकिन भीतर ही भीतर वह उसी पल का इंतज़ार कर रही थी, जिसका फैसला कई महीने पहले हो चुका था।
विजय घर से निकला और तय समय पर ग्वालियर के एक रेस्टोरेंट पहुँच गया। उसने अच्छी तरह तैयारी की थी। साफ-सुथरे कपड़े पहने थे, हाथ में फूलों का गुलदस्ता था और चेहरे पर उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। उसे पूरा विश्वास था कि आज वह पहली बार उस लड़की से मिलने जा रहा है, जिसके साथ वह पिछले कई महीनों से भविष्य के सपने देख रहा था।
दूसरी ओर उसकी पत्नी भी घर से निकली। उसने अपने लिए नए कपड़े चुने, अपना हुलिया थोड़ा बदला और चेहरे को इस तरह ढक लिया कि पहली नज़र में कोई उसे पहचान न सके। तय समय पर वह भी उसी रेस्टोरेंट के बाहर पहुँच गई। विजय को संदेश भेजा—"मैं बाहर खड़ी हूँ।"
संदेश मिलते ही विजय जल्दी-जल्दी बाहर आया। सामने खड़ी युवती को देखकर उसने मुस्कुराते हुए पूछा, "मोना?"
युवती ने हल्का-सा सिर हिलाया और उसकी ओर हाथ बढ़ाते हुए कहा, "हाँ... मैं मोना हूँ। क्या आप विजय कुमार हैं?"
विजय ने मुस्कुराकर "हाँ" कहा और जैसे ही उसने फूल आगे बढ़ाए, युवती ने अपने चेहरे से दुपट्टा हटा दिया।
अगले ही पल विजय के चेहरे का रंग उड़ गया।
जिस लड़की को वह पिछले कई महीनों से मोना समझकर प्यार भरे संदेश भेज रहा था, वह कोई और नहीं बल्कि उसकी अपनी पत्नी थी। कुछ क्षणों के लिए वह बिल्कुल स्तब्ध रह गया। उसके हाथ से फूलों का गुलदस्ता नीचे गिरते-गिरते बचा। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर वह क्या कहे। उधर पत्नी की आँखों में गुस्सा और निराशा साफ दिखाई दे रही थी।
उसने विजय से पूछा कि अगर वह सचमुच अविवाहित था, तो फिर वह कौन थी जिसके साथ वह पिछले एक साल से रह रहा था? उसने मोबाइल निकालकर एक-एक चैट उसके सामने खोलनी शुरू कर दी। हर वह संदेश, जिसमें विजय ने खुद को सिंगल बताया था, हर वह बातचीत जिसमें उसने मोना के साथ भविष्य की योजनाएँ बनाई थीं, सब कुछ अब उसके सामने था।
रेस्टोरेंट के बाहर कुछ ही मिनटों में लोगों की भीड़ जमा हो गई। दोनों के बीच बहस तेज होती गई। आसपास मौजूद लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर मामला क्या है। किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दे दी। कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुँची और दोनों को थाने ले जाया गया।
थाने में पूछताछ के दौरान पत्नी ने पूरी कहानी विस्तार से बताई। उसने बताया कि कैसे उसे पति पर शक हुआ, कैसे उसने "मोना" नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाई, कैसे कई महीनों तक बातचीत चलती रही और कैसे विजय ने एक बार भी यह स्वीकार नहीं किया कि वह शादीशुदा है। उसने मोबाइल में सुरक्षित चैट, कॉल रिकॉर्ड और दूसरे सबूत भी पुलिस को दिखाए।
चूँकि मामला पति-पत्नी के बीच का था, इसलिए पुलिस ने इसे महिला परामर्श केंद्र भेज दिया। वहाँ लगभग दो महीने तक दोनों की काउंसलिंग हुई। अधिकारियों ने दोनों पक्षों की बातें सुनीं और समझने की कोशिश की कि आखिर रिश्ते में इतनी दूरी क्यों आ गई थी। काउंसलिंग के दौरान विजय ने भी अपनी गलती स्वीकार की। उसने माना कि उसने सोशल मीडिया पर अपनी असली पहचान छिपाई थी और पत्नी से कई बातें साझा नहीं की थीं। दूसरी ओर पत्नी ने कहा कि अगर उसने फर्जी प्रोफाइल न बनाई होती, तो शायद उसे कभी अपने पति की सच्चाई पता ही नहीं चलती।
महिला थाने की प्रभारी दीप्ति सिंह तोमर ने बाद में बताया कि इस पूरे मामले की सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि कई महीनों तक लगातार चैट और फोन पर बातचीत होने के बावजूद विजय कुमार यह समझ ही नहीं पाया कि जिस लड़की को वह "मोना" समझ रहा है, वह उसकी अपनी पत्नी है। परामर्श केंद्र में लगातार बातचीत के बाद दोनों ने रिश्ते को एक और मौका देने का फैसला किया और मई 2025 के दूसरे सप्ताह में वे फिर से साथ रहने के लिए तैयार हो गए।
यह घटना लोगों के बीच लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रही। इससे पहले इंदौर में एंजेल शर्मा नाम की फर्जी प्रोफाइल के जरिए एक पुलिसकर्मी की कथित हरकतें भी सामने आ चुकी थीं। दोनों मामलों ने यह जरूर दिखाया कि सोशल मीडिया पर बनाई गई पहचान कई बार ऐसे सच उजागर कर देती है, जिन्हें लोग हमेशा के लिए छिपा हुआ मान लेते हैं। रिश्ते विश्वास से चलते हैं, लेकिन जब विश्वास की जगह शक ले लेता है, तो कई बार सच्चाई जानने के लिए लोग ऐसे रास्ते चुन लेते हैं, जिनका अंजाम किसी ने पहले नहीं सोचा होता।
नोट: यह लेख विभिन्न सार्वजनिक मीडिया रिपोर्टों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। पाठकों को घटनाक्रम को सरल और रोचक ढंग से समझाने के लिए इसे कथात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है, किसी व्यक्ति, संस्था या समुदाय की छवि को प्रभावित करना नहीं।
