सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लीलता, क्या बदल रही है समाज की सोच?

 

सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लीलता और उसके समाज पर पड़ते नकारात्मक प्रभाव को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर
Social Media Impact: आज सोशल मीडिया हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। सुबह उठते ही लोग सबसे पहले मोबाइल देखते हैं और रात को सोने से पहले भी आखिरी नजर सोशल मीडिया पर ही जाती है। लेकिन जहां इसने लोगों को जोड़ने का काम किया है, वहीं इसका एक दूसरा चेहरा भी तेजी से सामने आ रहा है। पिछले कुछ सालों में ऐसे वीडियो, रील्स और पोस्ट की संख्या बढ़ी है जिनमें गंदी भाषा, भद्दे मजाक और अश्लील इशारों को मनोरंजन के नाम पर पेश किया जा रहा है। सबसे चिंता की बात यह है कि इन्हें लाखों लोग देख रहे हैं और कई बार बिना सोचे-समझे शेयर भी कर रहे हैं।

कई कंटेंट क्रिएटर ज्यादा व्यूज और फॉलोअर्स पाने की होड़ में ऐसी बातें या हरकतें दिखाने लगे हैं जो परिवार के साथ बैठकर देखना भी मुश्किल हो जाता है। एल्गोरिदम भी अक्सर वही कंटेंट आगे बढ़ा देता है जिसे ज्यादा लोग देखते या उस पर प्रतिक्रिया देते हैं। ऐसे में अच्छी और ज्ञानवर्धक सामग्री कई बार पीछे रह जाती है, जबकि विवादित और भड़काऊ कंटेंट तेजी से वायरल हो जाता है।

इसका सबसे ज्यादा असर किशोरों और बच्चों पर पड़ता है। कम उम्र में जब वे बार-बार ऐसा कंटेंट देखते हैं तो कई बार उसे सामान्य व्यवहार मानने लगते हैं। धीरे-धीरे उनकी भाषा, सोच और ऑनलाइन व्यवहार में भी बदलाव दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ माता-पिता को सलाह देते हैं कि बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर नजर रखें और उन्हें यह समझाएं कि हर वायरल चीज सही या अपनाने लायक नहीं होती।

हालांकि यह भी सच है कि सोशल मीडिया खुद बुरा नहीं है। इसी प्लेटफॉर्म पर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, तकनीक और समाज से जुड़ी उपयोगी जानकारी भी हर दिन लाखों लोगों तक पहुंचती है। फर्क सिर्फ इतना है कि हम क्या देखते हैं, किसे फॉलो करते हैं और किस तरह के कंटेंट को बढ़ावा देते हैं। अगर लोग जिम्मेदारी के साथ अच्छे कंटेंट को ज्यादा पसंद और साझा करेंगे, तो प्लेटफॉर्म पर उसकी पहुंच भी बढ़ेगी।

सोशल मीडिया का इस्तेमाल आज की जरूरत है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। हमें यह समझना होगा कि कुछ सेकंड का मनोरंजन कभी-कभी समाज पर लंबा असर छोड़ सकता है। इसलिए ऐसा कंटेंट चुनना और बढ़ावा देना बेहतर है जो जानकारी दे, सकारात्मक सोच पैदा करे और समाज के लिए उपयोगी साबित हो।

नोट: यह लेख सोशल मीडिया के बदलते रुझानों और उनके संभावित सामाजिक प्रभावों पर सामान्य चर्चा के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या प्लेटफॉर्म को निशाना बनाना नहीं है।

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